20 लाख और उससे अधिक की शराब तस्करी मामले में रेंज आईजी/डीआईजी, ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी बारीकी से करंे जांच : गुजरात डीजीपी शिवानंद झा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  • 20 लाख और उससे अधिक की शराब तस्करी मामले में रेंज आईजी/डीआईजी, ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के अधिकारी बारीकी से करंे जांच : गुजरात डीजीपी शिवानंद झा
    - गुजरात में हो रही शराब तस्करी में लिप्त लोगों के लिए रेड सिग्नल: गुजरात डीजीपी ने जारी किया सख्त फरमान - मनी लाँडरिंग रोकथाम अधिनियम के तहत संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया भी की जाएं : डीजीपी गुजरात
    गांधीनगर, 3 मई। गुजरात राज्य में हो रही शराब तस्करी पर सख्ती से निपटने के लिए गुजरात पुलिस के डीजीपी ने सख्त फरमान जारी किया है। क्योंकि गुजरात राज्य पूर्णत: शराब बंदी वाला राज्य है। ऐसे में गुजरात में आये दिन हो रही शराब तस्करी पर सख्त कदम उठाते हुए गुजरात पुलिस ने यह कडा फरमान जारी किया है। गुजरात राज्य के डीजीपी शिवानंद झा ने शराब तस्करी मामलों पर राज्य के सभी पुलिस अधिकारियों को सख्ती बरतने के सख्त निर्देश दिए है। गुजरात राज्य के डीजीपी-सीआईडी(क्राइम व रेलवे), सभी पुलिस कमिश्नर, गुजरात राज्य के सभी रेंज मुखिया(डीआईजी रेलवे सहित), आईजीपी स्टेट मॉनिटरिंग सेल तथा सभी जिला पुलिस सुप्रीटेडेंट (अहमदाबाद व वडोदरा वेस्टर्न रेलवे) को शराब तस्करी पर लगाम कसने के लिए निर्देश दिये है। अपने पत्र में निर्धारित अपराध में शामिल मनी लॉडरिंग रोकथाम अधिनियम के तहत बडे शराब तस्करी मामलों पर प्रवर्तन निदेशालय की सिफारिश पर कार्रवाई करने के भी सख्त निर्देश दिये है। मनी लॉडरिंग अधिनियम 2002 की रोकथाम के तहत वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने प्रवर्तन निदेशालय को मान्यता दी है क्योंकि एजेंसी इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिकृत है। कहा गया है कि अधिनियम में संपत्ति को जब्त करने के लिए कड़े और प्रभावी प्रावधान हैं, जो किसी भी प्रक्रिया या अपराध की आय से जुड़ी गतिविधि के माध्यम से अधिग्रहित किये होने का संदेह है। अधिनियम के तहत यह भी कहा गया है कि, 'अपराध की आय' की परिभाषा अनुसार अपराध से संबंधित आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप किसी भी व्यक्ति द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्राप्त या संपत्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है। जबकि गुजरात प्रोहिबिशन एक्ट 1949 के तहत अपराध निर्धारित अपराधों में शामिल नहीं हैं, आईपीसी(उदाहरण के तौर पर धारा 467, 471, 472, 473, 475, 476, 484, 486, 487 और 488) के तहत बड़ी संख्या में निर्धारित अपराध हैं जिन्हें अक्सर अन्य राज्यों में स्थित डिस्टलरीज से आईएमएफएल खरीदने और गुजरात राज्य में आयात करने में बूटलगर्स द्वारा किया जाता है। जैसे ही बुटलेगर निर्धारित अपराध में से कुछ भी ऐसा गुनाह करता है और बुटलेगिंग की अपनी गतिविधि से सीधे या महत्वपूर्ण रूप से जुडा हुआ है तो प्रवर्तन निदेशालय के 'मनी लॉडरिंग रोकथाम अधिनियम' प्रावधानों को लागू करना कानूनी रूप से संभव हो जाता है और यह पुलिस अधिकारियों के लिए प्रवर्तन निदेशालय को स्थानांतरित करने के लिए संभव हो जाता है। तदनुसार ऐसे में यदि पर्याप्त आधार मौजूद है कि बूटलेगर द्वारा ऐसी गतिविधि चलाई जा रही है तो निर्धारित अपराधों के परिणामस्वरूप आरोपी के अपराधों पर कार्रवाई के लिए पर्याप्त है। यह पता लगाने के लिए कि मामले में बुटलेगिंग कुछ निर्धारित अपराधों पर गंभीर रूप से निर्भर है या नहीं, पुलिस प्राधिकरण द्वारा जब्त किए गए सामान की बनावट की वैधता की जांच करना आवश्यक है। मामले से संबंधित तस्करी के सामान को बेचने और उसके मालिकाना की जांच, सामान के ले जाने के उपयोग में लिए गये दस्तावेजों की वास्तविकता की जांच, शराब आयात करने के लिए उपयोग में लाये गये वाहन पर प्रदर्शित रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच और भूतकाल में इसी तरह के अपराधों में आरोपियों की भागीदारी समेत को पता लगाने के लिए उपयोग में लिया जाएगा। ऐसे में यदि शराब तस्करी संगठित अपराध सिंडीकेट से की जा रही है, तब ऐसे में इन पहलुओं के ध्यान में रखते हुए जांच को जांच दल द्वारा विभिन्न पार्टियों के तस्करी मामले से संबंध स्थापित करने में मदद मिलेगी। इसी सिलसिले में गुजरात डीजीपी शिवानंद झा ने पत्र में निर्देश दिये है कि 20 लाख रूपए से अधिक की पकडी गई शराब तस्करी मामलों में जांच संबंधित रेंज आईजी अथवा जिला के मामले में डीआईजी अथवा संबंधित ज्वाइंट/एडिशनल कमिश्नर अथवा अन्य जांच एजेंसी के मामले में संबंधित आईजी/डीआईजी ही बारीकी से निगरानी करेंगे। वे यह सुनिश्चित करेंगे की गुजरात नशाबंदी नियम की धारा 81 और 83 को ऐसे मामले में लागू किया जाएगा और बुटलेगिंग गतिविधि के सभी पहलुओं पर यह सुनिश्चित करने के लिए गहन जांच की जाएगी कि एक संगठित अपराध के रूप में तो यह अपराध नहीं किया ज रहा था। यदि जांच सकारात्मक रूप धारण करती है तो यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस अवैध अपराध मामलें में प्राथमिक्ता देते हुए अपराध सिंडिकेट के सभी सदस्यों के विरूद्ध एक चार्जशीट जल्द बनायी जाएगी। इसके अलावा उनके द्वारा डीजीपी/अतिरिक्त डीजीपी सीआईडी(क्राइम व रेलवे) को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी जाएगी जिसमें प्रवर्तन निदेशालय को बुटलेगिंग के अपराधों पर कार्रवाई करने के लिये मददरूप साबित हो।

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