दादरा नगर हवेली में अधूरी है खुले में शौच से मुक्ति की कहानी - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Saturday, September 22, 2018
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • दादरा नगर हवेली में अधूरी है खुले में शौच से मुक्ति की कहानी
    - 2011 की जनगणना के अनुसार जिन घरों में शौचालय नहीं था उन घरों में प्रशासन ने शौचालय बनवाये लेकिन उपयोग में नहीं है - खुले में शौच से होने वाले नुकसान की जागरूकता से वंचित है लोग जिसके कारण उपयोग में नहीं ला रहे हैं शौचालय - कहीं-कहीं कम कीमत के बने होने के कारण शौचालयों के खराब होने पर लोगों को मजबूरी में जाना पड़ रहा खुले में शौच करने - दादरा नगर हवेली में स्वच्छ आंगन योजना कार्यक्रम के तहत बनाए गए थे कुल 2703 शौचालय - औद्योगिक सीएसआर के तहत प्रदेश में 1550 शौचालय बने - स्वच्छ भारत योजना के तहत दादरा नगर हवेली में 14,517 शौचालय बनाकर दिए गए - जिसके बाद भी दादरा नगर हवेली को खुले में शौच से मुक्त प्रदेश किया गया था घोषित - शौचालय के बनाने में तकनीकी खामियों के कारण भी कुछ ही समय में खराब हो गए 50% शौचालय
    असली आजादी ब्यूरो, सिलवासा 4 मई। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली देश का एक ऐसा संघ शासित राज्य है जो पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत योजना को चरितार्थ करता नजर आता है। कागजों पर भले ही दादरा नगर हवेली प्रधानमंत्री योजना को पूरी तरह सफल बताते हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। स्वच्छ भारत योजना के प्रदेश में क्या हाल है यह जानने के लिए जब हमारे संवाददाता ने दादरा नगर हवेली के आंतरिक विस्तारों का दौरा किया तो स्वच्छ भारत योजना के तहत दादरा नगर हवेली को खुले में शौच से मुक्त प्रदेश घोषित की किये गए योजना की गहराई से देखने का मौका मिला। जहां पर इस योजना में कई खामियां तो कई अंतर द्वंद भी देखने को मिले। जिसको लेकर प्रशासन को भी विचार करने की आवश्यकता है और स्थानीय जनता को भी प्रधानमंत्री की योजना को हकीकत में लाने के लिए अपनी सोच और क्षमताओं के बल पर चरितार्थ करने की जरूरत है। अगर प्रशासन जरूरतमंदों को योजना का लाभ देता है तो लाभार्थी का दायित्व है कि इस सूचना को पूरी तरह से अमल में लाना है। लाभार्थी योजना का लाभ तो ले लेता है लेकिन उसे अनुपालित करने में वह पिछड़ता हुआ नजर आता है। जिसका मुख्य कारण योजना से संबंधित सही जानकारी और उससे संबंधित जागरुकता नहीं होना भी मुख्य वजह है। ऐसा ही कुछ स्वच्छ भारत योजना के तहत दादरा नगर हवेली में बनाए गए सरकारी अनुदान से शौचालयों का है जिनकी स्थिति कई मायनों में योजना के लिए दयनीय बनी हुई है। क्योंकि एक तो इस योजना के लिए एक शौचालय बनाने के लिए प्रशासन द्वारा सिर्फ 15000 आवंटित किए गए, लेकिन यह शौचालय उपयोग के लिए नहीं सिर्फ शोभा के लिए बन गए हैं। क्योंकि इन शौचालयों के लिए बनाए गए सेफ्टी टैंक सिर्फ 1 फुट से सवा फुट तक ही है जिससे इनका उपयोग करना एक परिवार के लिए पूरा नहीं है। वहीं इस योजना में शौचालय में बनाई गई खिड़की और दूसरी व्यवस्था नहीं होने के कारण यह पूरी तरह एक गुफा जैसा हो गया है जिसकी ऊंचाई सिर्फ 5.30 अथवा 6 फुट ही है। जहां पर बड़े ही मुश्किल से बैठा जा सकता है। ऐसे में जिन लोगों को भी यह शौचालय बनाकर दिए गए हैं वह लोग यही शिकायत करते हैं कि यह इतना छोटा है कि उसमें बैठा ही नहीं जाता है तो ऐसे में उन्हें मजबूरी में खुले में शौच करने जाना पड़ता है। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली प्रशासन के जिला पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा दादरा नगर हवेली के सभी गांव में 2011 की जनगणना के अनुसार ऐसे घरों को चिन्हित किया गया था जिनकी संख्या लगभग 18000 थी जिनके पास खुद के शौचालय नहीं थे। इन सभी परिवारों को शौचालय उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने कई योजनाओं के माध्यम से शौचालयों का निर्माण कार्य कराया। जिसके तहत सबसे पहले प्रशासन ने स्वच्छ आंगन योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत प्रशासन ने 2703 परिवारों को शौचालय बनाकर उपलब्ध कराये थे और इस योजना के तहत बनाए गए शौचालयों की कीमत लगभग 30 हजार प्रति शौचालय थी। वही इसी दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छ भारत योजना शुरू किए जाने के बाद दादरा नगर हवेली प्रशासन ने प्रदेश में कार्यरत औद्योगिक इकाइयों से आह्वान किया कि वे स्वच्छ भारत योजना के तहत गरीब ग्रामीण परिवारों को शौचालय बनाकर उपलब्ध कराएं जिससे स्वच्छ भारत योजना को सही रूप में आगे बढ़ाया जा सके। इस योजना के तहत सीएसआर के माध्यम से 15,500 प्रति शौचालय लागत के हिसाब से 1550 शौचालय बनाए गए। वहीं सीएसआर कार्यक्रम के बाद ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 14,517 बचे परिवारों को स्वच्छ भारत योजना के तहत जोड़ने के लिए इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें प्रति शौचालय 15,000 की लागत से इन परिवारों को शौचालय बनाकर उपलब्ध कराये लेकिन इन शौचालयों की कीमत कम होने के कारण इनकी गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया जिससे 1 साल के बाद ही 50% अधिक ऐसे शौचालय जो इन योजनाओं के तहत बनाए गए हैं उपयोग के लायक नहीं है। इस बारे में जब दादरा नगर हवेली के विकास एवं परियोजना अधिकारी कार्यालय से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि जिन परिवारों को शौचालय बनाकर दिये गये है यह परिवार कुछ ऐसे हैं जो कि जागरूकता की कमी के कारण उनका उपयोग नहीं कर रहे हैं। उपयोग नहीं किए जाने से बहुत सारे शौचालय खराब हो गए हैं। वही विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब नया सर्वे कराया जा रहा है और जिन घरों में शौचालय नहीं है उन घरों में भी शौचालय उपलब्ध कराने की योजना दादरा नगर हवेली प्रशासन बना रहा है। जिससे खुले में शौच से मुक्ति का जो अभियान चलाया गया है उसे सही मायनों में लागू किया जा सके। वही इस बारे में विभाग का भी मानना है कि जागरूकता की कमी से खुले में शौच से मुक्त को थोड़ा विराम लग रहा है। जिसको लेकर विभाग नई रणनीति बना रहा है और उन लोगों को खुले में शौच से मुक्ति का फायदा बताने के लिए अभियान चलाने की नई योजना भी बना रहा है। अब देखना यह है कि जिस तरह से खराब हो चुके शौचालयों और ऐसे ग्रामीण जो कि इन शौचालयों में जाना नहीं चाहते इन सभी समस्याओं से प्रशासन कैसे निपटेगा। जो खुले में शौच से मुक्त दादरा नगर हवेली की घोषणा की है क्या कागजों के बाद जमीनी हकीकत पर आने वाले वर्षों में उसकी झलक देखने को मिलेगी।
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