दमण में बच्चों को पढाना, बच्चों का खेल कतई नहीं है - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Tuesday, June 19, 2018
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • दमण में बच्चों को पढाना, बच्चों का खेल कतई नहीं है
    केन्द्रशासित प्रदेश दमण में आज महिलाओं ने हिम्मत दिखाकर प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस एवं डोनेशन सहित का पैसा वसूले जाने का मुद्दा उठाकर सभी को गंभीरता से इस मुद्दे पर सोचने पर मजबूर कर दिया है। दमण के बहुत ही कम माता-पिता होंगे जिन्हें अपने बच्चे की स्कूल फीस को लेकर चिंता ना होती हो। दूसरी तरफ स्कूल है कि हर बढती क्लास के साथ फीस में 20 प्रतिशत की बढोत्तरी कर देता है। इतना ही नहीं साल भर में किसी न किसी नाम पर प्राइवेट स्कूल माता-पिता की जेब काटते ही रहते है। आखिर क्यों प्राइवेट स्कूल अब शिक्षा केन्द्रों की जगह किसी दुकान सा रूप लेते जा रहे है। एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक 2005 से 2015 तक प्राइवेट स्कूलों की स्कूल फीसों में 150 फीसदी का इजाफा हुआ है। इसी तर्ज पर 2018 तक का लेखा-जोखा निकाला जाएं तो यह आंकडा 200 फीसदी को पार कर जायेगा। प्राइवेट स्कूलों द्वारा नर्सरी में प्राइमरी से ज्यादा फीस वसूली जा रही है। बच्चों की बढती क्लास के साथ स्कूल फीस में भी बढोत्तरी करते है। डोनेशन के नाम पर तो कभी बैग, जूतों, यूनिफार्म के नाम मनमाने दाम लगाकर प्राइवेट स्कूलों के बच्चों से अभिभावकों से ज्यादा पैसे वसूला जा रहा है। अधिकतर स्कूल किताबों के लिए दुकान तय करते है। इतना ही नहीं प्राइवेट स्कूलों में इंवेंटस के नाम पर बार-बार वसूली की जाती है। देश के राज्यों ने तो अभिभावकों की समस्या को समझते हुए नर्सरी, प्राइमरी, सेकेंडरी एवं हायर सेकेंडरी के लिए फीस की सीमा तय कर दी है। लेकिन केन्द्रशासित प्रदेश होने की वजह से दमण में जनता की आवाज ठीक से सुनी नहीं जा रही थी। आज आखिरकार अमी पटेल ने प्राइवेटों स्कूलों की मनमानी के खिलाफ आवाज उठाकर यह संकेत दे दिये है कि अब यहां से उठी आवाज रूकेगी नहीं, इस आवाज को गंभीरता से सुनना पडेगा। सही में आज अमी पटेल ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से परेशान छात्रों के माताओं का दर्द समझते हुए पहली बार दमण के इतिहास में प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ जो आवाज उठाई गई यह काबिले तारीफ है। अब दमण प्रशासन और शिक्षा विभाग को अभिभावकों की आवाज पर गंभीरता दिखाते हुए अन्य राज्यों की तरह सख्त कदम उठाना ही पडेगा। तब जाकर प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम लग सकेंगी।
    विजय भट्ट
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