महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक बैन काअसर दमण के उद्योगों पर दिखने लगा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  • महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक बैन काअसर दमण के उद्योगों पर दिखने लगा
    - देश का प्लास्टिक मानचेस्टर दमण अब तक के सबसे बुरे दौर में - दीपावली के बाद दमण के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित प्लास्टिक इंडस्ट्रीज पर दिखने लगे ताले - दीपावली से पूर्व कंपनी प्रबंधन ने मजदूरों को नई नौकरी ढूंढने का सुना दिया था फरमान - प्लास्टिक इंडस्ट्रीज पर करोडों रुपये की लोन देने वाली बैंकों पर एनपीए का बढा खतरा - उत्पादन बदलने का मौका नहीं मिलने से उद्योगपति भी निराश
    असली आजादी ब्यूरो, दमण, 21 नवंबर। देश का प्लास्टिक मानचेस्टर दमण अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश सहित के अनेक राज्यों द्वारा विभिन्न प्लास्टिक उत्पादों पर बैन लगा देने से दमण के प्लास्टिक उद्योग की कमर टूट चुकी है। दीपावली के बाद दमण के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में प्लास्टिक इंडस्ट्रीज पर ताले लटकते दिख रहे हैं। जानकार बताते हैं कि प्लास्टिक इंडस्ट्रीज ने दीपावली तक कुछ राहत मिलने का इंतजार किया था लेकिन विभिन्न राज्यों द्वारा सख्ती से प्लास्टिक बैन का अमल करने पर प्लास्टिक उद्योग से जुडे उद्योगपतियों ने अपनी-अपनी कंपनियों का शटर गिराना ही मुनासिब समझा। प्लास्टिक इंडस्ट्रीज से जुडे मजदूरों के मुताबिक, उन्हें दीपावली के समय बोनस के साथ नई नौकरी ढूंढने का फरमान प्लास्टिक उद्योगपतियों द्वारा दे दिया गया था। मजूदरों के मुताबिक, उनके कई साथी दीपावली के बाद दमण लौटे ही नहीं। गौरतलब है कि दमण में 70 प्रतिशत प्लास्टिक इंडस्ट्रीज है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश सहित के राज्यों ने प्लास्टिक के पेय पानी के 200 मिली से कम की पेट बोतल, प्लास्टिक मिनरल पानी पाउच, प्लास्टिक बैग(हेंडल सहित/बिना हेंडल), थर्मोकोल अथवा प्लास्टिक से बने एक बार उपयोगी चम्मच, डीश, कप, प्लेट, ग्लास, फॉर्क, बाउल, कंटेनर, होटल में खाद्य चीजों के पैकेजिंग के उपयोग में लिये जानेवाले डिस्पोजेबल डीश, बाउल वगैरह, पौधे नर्सरी, बागवानी, कृषि और ठोस अपशिष्ट को संभालने के अलावा सभी कंपोस्टेबल प्लास्टिक बैग, सजावट के उद्देश्य के लिए प्लास्टिक और थर्मोकॉल पर संपूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में इन उत्पादन करने वाले उद्योगों के लिए तालाबंदी ही एक मात्र विकल्प बचा था। दमण के प्लास्टिक उद्योग की कमर टूटने का सीधा असर यहां की अर्थव्यस्था पर भी पड रहा है। कभी दिन में सैकडों टेंपो माल की ढुलाई में व्यस्त रहते थे लेकिन आज ज्यादातर टेंपो इंडस्ट्रीयल पार्किंगों में ही खडे दिख रहे हैं। ट्रांसपोर्टरों की भी हालत दयनीय हो गई है। प्लास्टिक इंडस्ट्रीज में तालेबंदी का असर बैंकों पर भी पडना तय है। क्योंकि ज्यादातर उद्योगों ने दमण की विभिन्न सरकारी एवं निजी बैंकों से कर्ज ले रखा है। यही हाल रहा तो दमण की बैंको का एनपीए (नॉन परफोर्मिंग एसेट) खतरे के निशान से ऊपर चला जायेगा। कुल मिलाकर देखें तो विभिन्न राज्यों का प्लास्टिक बैन दमण के लिए आर्थिक बैन साबित हो रहा है।
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