दमण की जनता को 1996 से सीआरजेड के नाम पर परेशान करने वाले प्रशासन के पास नहीं है सीआरजेड का अधिकृत नक्शा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  • दमण की जनता को 1996 से सीआरजेड के नाम पर परेशान करने वाले प्रशासन के पास नहीं है सीआरजेड का अधिकृत नक्शा
    - दमण के नागरिक द्वारा सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई जानकारी का डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट ने लिखित में दिया जबाव
    असली आजादी ब्यूरो, दमण 27 मार्च। केन्द्रशासित प्रदेश दमण की जनता को 1996 से सीआरजेड उल्लंघन के नाम पर परेशान करने वाले संघ प्रशासन के पास सीआरजेड का अधिकृत नक्शा उपलब्ध ही नहीं है। सूचना का अधिकार कानून के तहत दमण के नागरिक द्वारा मांगी गई जानकारी का जबाव डिप्टी कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट ने लिखित में देते हुए कहा कि दमण अरबी समुद्र एवं खाडी से सीआरजेड चिन्हित किया हुआ दमण का मेप उनके पास उपलब्ध नहीं है। डीसीएफ के जवाब के बाद अब यह तय हो चुका है कि 1996 से सीआरजेड नोटिफिकेशन के अमल के साथ प्रशासन ने सीआरजेड के नाम पर समुद्र किनारे एवं खाडी तथा नदी के पास इमारत के निर्माणों को रोकता आया है। कई बार तोडक कार्यवाही भी सीआरजेड के नाम पर प्रशासन ने की है। लेकिन प्रशासन के अधीन सीआरजेड के मामले को देखने वाले अधिकारी ने लिखित में कबूला है कि उनके पास कोई अधिकृत नक्शा नहीं है। बता दें कि दमण के एक जागरूक नागरिक ने जनता को रही सीआरजेड संबंधी समस्याओं का निदान करने के लिए सीआरजेड की दमण में वास्तविक स्थिति क्या है यह समझने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत संघ प्रशासन से नानी दमण और मोटी दमण के ग्रामीण एवं शहरी विस्तार का नक्शा मांगा था, जिसमें खाड़ी और अरब सागर के साथ कोस्टल रेग्युलेशन जोन लाइन का सीमांकन किया गया हो। साथ ही निर्माण प्रतिबंधित क्षेत्र की मीटर में दूरी की लाइनों का उचित रूप में उल्लेख किया गया हो। इसके अलावा खाड़ी और अरब सागर की निर्धारित मीटर के साथ प्रतिबंध वाले क्षेत्र की लाइन को विधिवत रूप से चिहिन्त किया गया हो। गौरतलब है कि 1991-92 में केन्द्र सरकार ने पूरे देश में सीआरजेड कानून लागू किया था। समुद्र किनारे बसे दमण-दीव में 1996 में नोटिफिकेशन के साथ इसका अमल शुरू हुआ था। उस वक्त एसी चेम्बर में बैठकर तत्कालीन अधिकारियों ने दमण-दीव को अपनी मनमर्जी के तहत सीआरजेड-1, 2 एवं 3 की परिधि में ला दिया था। लेकिन दमण-दीव की भौगोलिक परिस्थिति को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया था। अधिकारियों ने सीआरजेड का हाईटाइड एवं लो-टाइड लाइन चिन्हित करने वाला नक्शा भी तैयार करवाकर चीफ हाईड्रोग्राफर देहरादून से मंजूर कराना भी उचित नहीं समझा था। 2011 में यूपीए सरकार ने पूरे देश में सीआरजेड को सीएमजेड में तब्दील करने के लिए प्रक्रिया शुरू की थी। दमण-दीव को 2012-13 तक सीएमजेड का नक्शा तैयार करना था। जिसमें हाईटाइड एवं लो-टाइड लाइन का सर्वे करवाकर उसे इस नक्शे में शामिल करना था। दमण-दीव प्रशासन तय सीमा में तो नक्शा तैयार नहीं कर पाया था। 2014 में तत्कालीन डेवलपमेंट कमिश्नर संदीप कुमार ने यह काम अपने हाथ में लिया था। 2016 में तत्कालीन प्रशासक विक्रम देव दत्त ने दमण-दीव का तैयार किया गया प्रस्तावित मेप जनता के सुझाव एवं आपत्ति सहित के दस्तावेजों के साथ वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा था। इस बात को भी दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक यह मामला भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय में लंबित पडा हुआ है।

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