गोवा-दमण-दीव सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1998 में हुआ बड़ा संशोधन - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Saturday, November 17, 2018
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • गोवा-दमण-दीव सोसायटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1998 में हुआ बड़ा संशोधन
    - संशोधन के बाद अब दादरा नगर हवेली सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के नाम से जाना जाएगा नया अधिनियम - धारा दो के खंड-घ के अनुसार प्रशासक होंगे इस नए अधिनियम के अनुपालन के सर्वेसर्वा - दादरा नगर हवेली में अभी तक सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत संस्थाओं पर सरकार नहीं कर पा रही थी निगरानी, नए कानून के अनुसार पंजीकृत सभी सोसायटियों की निगरानी कर सकेगा दादरा नगर हवेली सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पदस्थ रजिस्टार - कई बड़ी पंजीकृत संस्थाओं में चल रही धांधली एवं नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले लोगों के लिए आ सकते हैं बुरे दिन
    सिलवासा 22 अक्टूबर। संघ प्रदेश दादरा नगर हवेली में अब नियम कानूनों को नए स्वरूप में अमलीजामा पहनाया जा रहा है। एक के बाद एक पुराने कानूनों को जहां हटाया जा रहा है, वहीं उनके स्थान पर नए कानून बनाए जा रहे हैं जो कि समय की मांग के अनुरूप है। इसी के तहत आज भारत सरकार के राष्ट्रपति द्वारा दादरा नगर हवेली के लिए दादरा नगर हवेली सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट का नया स्वरूप भी दिया गया जो अभी तक गोवा-दमण-दीव सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के नाम से जाना जाता था। अब यह अधिनियम दादरा नगर हवेली सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के नाम से जाना जाएगा और इस अधिनियम के अनुसार पंजीकृत सभी सामाजिक संस्थाएं सरकार द्वारा पदस्थ रजिस्टार की निगरानी में काम करेंगे और जो पंजीकृत सोसायटी है नियमों के अनुरूप काम नहीं कर रही हैं उन पर शिकायत मिलने पर रजिस्टार अंतरिम अधिकारी की नियुक्ति कर सोसायटी का कार्यभार अपने अधीन कर सकता है, जैसा कि अभी तक पुराने कानून में नहीं था। नयी अधिसूचना के मुताबिक, नई धाराओं 20क, 20ख, 20ग, 20घ और 20ड का अंत: स्थापन - मूल अधिनियम की धारा 20 के पश्चात निम्नलिखित धाराएं अन्तएं स्थापित की जाएंगी, अर्थात्: 20क सोसायटी के कामकाज का अन्वेषण - (1) जहां धारा 4क के अधीन या अन्यथा सूचना प्राप्त होने पर या धारा 12घ में निर्दष्टि परिस्थितियों में महानिरीक्षक को यह आशंका है कि इस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किसी सोसायटी इस प्रकार से संचालित की जा रही है जो सोसायटी के उद्देश्यों को विफल करे या यह कि सोसायटी या इसके शासी निकाय, जिस नाम से भी पुकारा जाए, सोसायटी पर वास्तविक प्रभावी नियंत्रण वाले इसका कोई अधिकारी इसके कामकाज के कुप्रबंध की दोषी है, या वैश्वासिक या इस प्रकार की अन्य बाध्यताओं का भंग हुआ है, तब महानिरीक्षक या तो स्वयं या उसकी ओर से नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा सोसायटी के कामकाज का निरीक्षण या अन्वेषण कर सकेगा या सोसायटी द्वारा प्रबंधित किसी संस्था का निरीक्षण कर सकेगा। (2) सोसायटी के प्रत्येक अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि महानिरीक्षक या उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किसी व्यक्ति द्वारा अपेक्षित सोसायटी से संबंधित लेखाबही या अन्य अभिलेख, जो उसकी अभिरक्षा में है, उसे पेश करे या ऐसे निरीक्षण या अन्वेषण के संबंध में उसे सभी प्रकार की सहायता करे। (3) महानिरीक्षक या उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अन्य व्यक्ति सोसायटी के कामकाज के संबंध में किसी कर्मचारी या किसी अधिकारी या सदस्य को बुला सकेगा और शपथ पर परीक्षा कर सकेगा और प्रत्येक अधिकारी, सदस्य या कर्मचारी का यह कर्तव्य होगा कि जब भी उसे बुलाया जाएगा, उसके समक्ष ऐसी परीक्षा के लिए उपसंजात हो। (4) महानिरीक्षक या उपधारा (1) के अधीन नियुक्त अन्य व्यक्ति की यदि यह राय है कि निरीक्षण या अन्वेषण के उद्देश्यों के लिए यह आवश्यक है तो वह सोसायटी के लेखाबहियों सहित किसी या सभी अभिलेखों का अभिग्रहण कर सकेगा, परंतु यह कि कोई व्यक्ति, जिसकी अभिरक्षा से अभिलेखों का अभिग्रहण किया गया है, उस व्यक्ति की उपस्थिति में, जिसकी अभिरक्षा में ऐसा अभिलेख है, उसकी प्रतिलिपि लेने का हकदार होगा। (5) निरीक्षण या अन्वेषण, यथास्थिति, की समाप्ति पर महानिरीक्षक द्वारा निरीक्षण या अन्वेषण के लिए नियुक्त व्यक्ति, यदि कोई हो, निरीक्षण या अन्वेषण के परिणाम के संबंध में रिपोर्ट महानिरीक्षक को देगा। (6) महानिरीक्षक, ऐसे अन्वेषण या निरीक्षण के पश्चात सोसायटी या इसके शासी निकाय या इसके किसी अधिकारी, जैसा वह उचित समझे, को ऐसा निदेश दे सकेगा कि कोई त्रुटियां या अनिमितताएं ऐसे समय के भीतर दूर की जाएं, जैसा की विनिर्दष्टि किया जाए और ऐसे निर्देशों के अनुसरण में कार्रवाई करने के व्यतिक्रम की स्थिति में महानिरीक्षक धारा 12घ के अधीन कार्यवाही करने के लिए अग्रसर हो सकेगा। 20ख, शास्ति-यदि कोई व्यक्ति धारा 4 के द्वारा अपेक्षित सूची में या महानिरीक्षक को भेजे गए नियमों या नियमों के परिवर्तन की प्रति के विवरण में या से जानबूझकर कोई मिथ्या प्रविष्टि दर्ज करता है या करवाता है या से लोप करता है या धारा 12घ द्वारा यथा अपेक्षित संपरीक्षा के लिए उपलब्ध अन्य दस्तावेजों या इसके खातों को बनाने से इंकार या उपेक्षा करता है या धारा 20क की उपधारा (2) द्वारा यथा अपेक्षित लेखाबही या अन्य अभिलेख पेश करने में जानबूझकर असफल रहता है या महानिरीक्षक या इसके द्वारा नियुक्त अन्य व्यक्ति के समक्ष उपसंजात होने से जानबूझकर असफल रहता है या धारा 20क की उपधारा (3) के उपबंधों का अन्यथा उल्लंघन करता है, जुर्माने से दंडनीय होगा जिसे 2000/- रुपए तक बढ़ाया जा सकता है। 20ग, अपराध का संज्ञान- इस अधिनियम के अधीन दंडनीय किसी अपराध का विचारण प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट से निम्नतर किसी न्यायालय द्वारा नहीं किया जाएगा और न ही किसी ऐसे अपराध का संज्ञान, महानिरीक्षक या साधारण या विशेष आदेशों द्वारा इसके द्वारा लिखित रूप में इसकी ओर से प्राधिकृत किसी व्यक्ति के परिवाद के अलावा लिया जाएगा। 20घ, अपराध के शमन की शक्ति- (1) सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा महानिरीक्षक या इसके लिए प्राधिकृत किसी अधिकारी को इस बात के लिए सशक्त कर सकेगी कि किसी व्यक्ति से जिसके विरूद्ध यह युक्तियुक्त संदेह विद्यमान है कि उसने धारा 20ख के अधीन दंडनीय अपराध किया है या जिसके विरूद्ध उस धारा के अधीन अभियोजन संस्थित है, शमन राशि के रूप में कोई धनराशि उस अपराध के लिए, जिसका कि वह व्यक्ति संदिग्ध है या उसके करने का अभियुक्त है,स्वीकार करे। (2) ऐसी शमन राशि के संदाय पर यदि वह व्यक्ति अभिरक्षा में है तो वह उन्मोचित कर दिया जाएगा और उसके विरुद्ध अन्य कार्यवाही नहीं की जाएगी, और यदि ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध अभियोजन संस्थित है तो शमन का प्रभाव उनकी दोषमुक्ति होगी।

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