प्रधानमंत्री मोदी की सांसदों को नसीहत: 'सिर्फ पॉलिटिक्स' अब बीते जमाने की बात, जनता के बीच जाएं - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
  •  

  • RNI NO - DDHIN/2005/16215 Postal R.No.:VAL/048/2012-14

  • देश-विदेश
  • विचार मंथन
  • दमण - दीव - दानह
  • गुजरात
  • लिसेस्टर
  • लंदन
  • वेम्बली
  • संपर्क

  •         Tuesday, November 20, 2018
  • Gallery
  • Browse by Category
  • Videos
  • Archive
  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • प्रधानमंत्री मोदी की सांसदों को नसीहत: 'सिर्फ पॉलिटिक्स' अब बीते जमाने की बात, जनता के बीच जाएं
    - प्रधानमंत्री ने संसद के केंद्रीय हॉल में राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन को संबोधित किया
    - पीएम मोदी ने सांसदों से कहा कि आपने कितने विरोध किए, आपने कितने मोर्चे निकालें और कितनी बार आप जेल गए संभवत: 20 साल पहले आपके राजनीतिक करियर में मायने रखता होगा, लेकिन अब बात बदल गई है - पीएम ने कहा कि आप सत्ता में हों या विपक्ष में, मतलब सिर्फ इस बात से है कि आप लोगों की मदद को आगे आते हैं या नहीं - देश में बैकवर्ड नहीं, फॉरवर्ड की स्पर्धा करनी है: प्रधानमंत्री मोदी - पिछले जिलों में युवा अधिकारियों की की जाए तैनाती: मोदी - देश के 115 पिछड़े जिलों का विकास हो गया तो देश का विकास होगा: पीएम
    नई दिल्ली (ईएमएस)। पीएम नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि एक जमाना था, जब देश में हर वक्त राजनीति होती थी। अब वक्त बदला है,आप सत्ता में हैं या विपक्ष में हैं,यह महत्वपूर्ण हो गया है कि आप जनता के लिए कितना काम करते हैं। अब सिर्फ मोर्चा निकालने से ही जनता का समर्थन नहीं मिलता। आम लोग अब इस बात का विचार करते हैं कि हमारे जीवन में बदलाव के लिए कौन लोग हमारे साथ हैं। संसद के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनप्रतिनिधि सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि हमारा संविधान दुनिया में विशेष है। देश के 115 पिछड़े जिलों के विकास की बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यदि इनका सुधार हो गया तो देश का विकास अपने आप हो सकेगा। यदि किसी राज्य में कुछ जिले बहुत अच्छा कर सकते हैं तो इसका मतलब है कि सूबे में क्षमता है। लेकिन, कुछ पीछे रह गए हैं तो हमें उनका भी ध्यान देना चाहिए। राज्य या भारत सरकार जब लक्ष्य तय करते हैं तो आसानी से नतीजे देने वालों पर जोर दिया जाता है। इसके चलते जो अच्छा करते हैं, वे तेजी से आगे बढ़ते हैं। लेकिन,जो पिछड़ जाते हैं वो और पीछे चले जाते हैं।
    आमतौर पर डिस्ट्रक्टि कलेक्टर्स की औसत आयु 28 से 30 साल तक होती है। लेकिन, कई बार पिछड़े जिलों में अधिक आयु के डीएम को लगाया जाता है। हमें तय करना होगा कि इसतरह के 115 जिलों में हम उन्हीं अधिकारियों को लगाएं, जिनमें जज्बा है और कुछ कर सकते हैं। यदि इसतरह के जिलों में अफसरों की तैनाती होती है तो कहते हैं कि कहां भेज दिया? यह साइको ही समस्या की जड़ है। कई बार एक ही जैसे संसाधनों में अलग-अलग जिलों की स्थिति अलग होती है। इसकी वजह संसाधनों की कमी नहीं है बल्कि प्रयासों में कमी है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में सबसे बड़ी समस्या बैकवर्ड का साइको है। हम सोचते हैं कि यह जिला तो पिछड़ा है,हम पिछड़े जिले से हैं। ऐसा सोचना गलत है,हम बैकवर्ड नहीं बल्कि फॉरवर्ड की होड़ करनी चाहिए।

    FLICKER
    Download Asliazadi's apple and android apps
    फोटो गैलरी
    वीडियो गैलरी
    POLLS