दमण की दमणगंगा नदी गुजरात के प्रदूषण से हो गई मैली - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Saturday, June 23, 2018
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • दमण की दमणगंगा नदी गुजरात के प्रदूषण से हो गई मैली
    - पिछले कुछ दिनों से लगातार वापी की ओर से छोडे जा रहे प्रदूषित पानी के चलते दमण के पर्यावरण पर बढा है खतरा - दमण की प्राकृतिक सुंदरता को बचाने के लिए दमणवासियों को उतरना पडेगा सडकों पर - मछुआरों का हाल सबसे बुरा: पूरे दमण में प्रदूषण के चलते स्कीन एलर्जी के भी बढे मामले - प्रशासक प्रफुल पटेल को ही करना पडेगा हस्तक्षेप: गुजरात सरकार से करनी पडेगी बात - पिछले 40 सालों से दमणगंगा नदी प्रदूषण के कारण बन गई है गटरगंगा नदी
    असली आजादी ब्यूरो,दमण, 29 दिसंबर। केन्द्रशासित प्रदेश दमण की जीवनरेखा समान दमणगंगा नदी गुजरात के प्रदूषित पानी के चलते पूरी तरह से प्रदूषित हो गई है। पिछले कुछ दिनों से दमणगंगा नदी में लगातार गुजरात के वापी की ओर से प्रदूषित पानी छोडा जा रहा है। आज तो प्रदूषण की मात्रा इतनी ज्यादा थी कि ब्रिज पर से ही दमणगंगा का काला पानी साफ-साफ नजर आ रहा था। दमणगंगा नदी में पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ रहे प्रदूषण के चलते नदी किनारे रहने वाले नागरिकों में स्कीन एलर्जी तेजी से बढ गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से मेडिकल स्टोर एवं डॉक्टरों के पास स्कीन संबंधित मरीज ज्यादा पहुंच रहे हंै। दमणगंगा नदी में प्रदूषण कोई नई समस्या नहीं है। यह समस्या चार दशक पहले वापी में केमिकल उद्योग को मंजूरी मिली थी तब से ही है। लेकिन दो दशक पहले वापी सीईटीपी शुरु होने के बाद दमणवासियों में यह आशा जगी थी कि अब वापी का प्रदूषित पानी सीईटीपी से शुद्ध होकर ही नदी में छोडा जायेगा। लेकिन सीईटीपी के कार्यरत होने के बावजूद दमणगंगा नदी लगातार प्रदूषण की भेंट चढ रही है। नदी के प्रदूषण का सबसे ज्यादा प्रभाव मत्स्य उद्योग पर पडा है। क्योंकि दमणगंगा नदी का यह प्रदूषित पानी न सिर्फ नदी को प्रदूषित कर रहा है बल्कि अरबी समुद्र के तटीय क्षेत्र को भी अपनी चपेट में ले रहा है। जिसके चलते समुद्र के 10 नोटिकल माइल में मच्छीमारी करने वाले मछुआरों के हाथों में प्रदूषित पानी की मछली हाथ लगती है। कई बार तो भारी तादाद में केमिकल के रंग से रंगी हुई मरी हुई मछली ही हाथ लगती है। ऐसी मछली के खाने से भी नागरिकों के सेहत पर बुरा प्रभाव पड रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए अब प्रशासक प्रफुल पटेल को ही संज्ञान लेना होगा। जनता चाहती है कि प्रशासक प्रफुल पटेल प्रदूषण के मुद्दे पर गुजरात सरकार से सीधी बातचीत करें। गौरतलब है कि दमण में विभिन्न मुद्दों पर कई बार जनता सडकों पर उतर चुकी है। लेकिन इस बार प्रदूषण के मुद्दे पर दिल्ली और गांधीनगर तक आवाज पहुंचाने के लिए जनता को शायद सडकों पर उतरना पड सकता है।
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