भाजपा पाटीदार पावर के बिना नहीं जीत सकती गुजरात का विधानसभा चुनाव - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Friday, December 15, 2017
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  • भाजपा पाटीदार पावर के बिना नहीं जीत सकती गुजरात का विधानसभा चुनाव

    - राज्यसभा चुनाव के बाद गुजरात में बदले राजनैतिक समीकरण
    - गुजरात के पाटीदार सांसदों को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में देना पडेगा स्थान - गुजरात के दिग्गज पाटीदार नेताओं को गुजरात की देनी होगी जिम्मेदारी - महाराष्ट्र सरकार द्वारा मराठा समाज के लिए निकाले गये फॉर्मूले की तर्ज पर गुजरात में भी पाटीदारों के लिए तैयार करना पडेगा फॉर्मूला - गुजरात विधानसभा के चुनाव में मुख्यमंत्री के रुप में किसी को भी प्रोजेक्ट करना भाजपा के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है, सिर्फ नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही भाजपा को लडना चाहिए चुनाव
    असली आजादी कार्यालय ब्यूरो, दमण 10 अगस्त। गुजरात में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति विफल होने के बाद राजनैतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गये है। गुजरात के मुख्यमंत्री, गुजरात के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और उनकी टीम द्वारा पिछले कुछ दिनों में किये गये राजनैतिक दावपेंच के चलते पूरे देश में भाजपा की किरकिरी हुई है। राज्यसभा चुनाव में इतनी ताकत लगाने के बाद भी अहमद पटेल द्वारा जीत हासिल करने के साथ ही मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और गुजरात राज्य के भाजपा अध्यक्ष जीतू वाघाणी की राजनैतिक क्षमता पर सवालिया निशान लग गये है। गुजरात में भाजपा का जो एक अच्छा माहौल था वह माहौल भाजपा के कुछ नेताओं की वजह से बिगड चुका है। बताया जाता है कि गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जीतू वाघाणी ने राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आखिरी समय तक सही चित्र पेश नहीं किया था, जिसके चलते दो सीट राज्यसभा की जीतने के बाद भी अमित शाह को जीत की खुशी नहीं मिली है। गुजरात में अब भाजपा सिर्फ पाटीदार पावर से ही फिर से सत्ता हासिल कर सकती है। गुजरात की कुल आबादी में से 20 प्रतिशत आबादी पाटीदारों की है। पिछले 22 सालों से पाटीदारों ने हमेशा भाजपा का साथ निभाया है। ग्राम पंचायत चुनाव हो, जिला पंचायत चुनाव हो, नगरपालिका चुनाव हो, महानगरपालिकाओं के चुनाव हो, विधानसभा के चुनाव हो या फिर लोकसभा के चुनाव हो, पाटीदारों ने दिल खोलकर भाजपा की झोली में कमल वर्षा की है। पाटीदारों का मन टटोलने में अब वर्तमान गुजरात भाजपा की सरकार कुछ हद तक विफल साबित हो रही है। गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर पाटीदार का हट जाना भी पाटीदारों के लिए नाराज करने वाला घटनाक्रम साबित हुआ है। अब अगर भाजपा को 2017 का विधानसभा चुनाव जीतना है तो सबसे पहले गुजरात के पाटीदार नेताओं को गुजरात की ही जिम्मेदारी सौंपनी होगी। गुजरात के जो पाटीदार सांसद है उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण स्थान देना होगा। भाजपा संगठन और उम्मीदवार चयन समिति में भी पाटीदारों को विशेष पद देने होंगे। जिस प्रकार से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मराठाओं के आंदोलन को गंभीरता से लेते हुए उसका समाधान जो किया है। उसी तर्ज पर गुजरात सरकार को भी पाटीदारों के साथ बैठकर इसी प्रकार से समाधान निकालना होगा। गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में भारतीय जनता पार्टी को किसी व्यक्ति विशेष के चेहरे के साथ चुनाव में नहीं उतरना चाहिए। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चेहरे को ही आगे रखकर चुनाव लडना चाहिए। अगर वर्तमान सरकार के ही मुख्यमंत्री को अगले मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करते हुए चुनाव लडा जाता है तो भाजपा को भारी नुकसान होने की भी संभावना है। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व ने पूरे गुजरात में सर्वे करवाया था। उस सर्वे में भाजपा 70 सीट से 90 सीट के बीच ही अटकती दिख रही थी। गुजरात में हार्दिक पटेल, लालजी पटेल, अल्पेश ठाकोर, जिज्ञेश मेवाणी सहित के विभिन्न समाज के युवाओं ने अपने-अपने समाज के लिए गुजरात सरकार के सामने संघर्ष छेडा हुआ है। गुजरात में पाटीदार, दलित, ओबीसी अगर भाजपा से मुंह मोड लेगे तो भाजपा के पास सिर्फ 25 प्रतिशत वोट ही बचेगे। अब भाजपा विधानसभा चुनाव 2017 के चुनाव चक्रव्यूह को किस तरह तोड पाती है इस पर नजर रहेगी, लेकिन आज की परिस्थिति में राज्यसभा की एक सीट के लिए की गई जिद्द के कारण गुजरात भाजपा के नेताओं ने कांग्रेस को न सिर्फ ऑक्सीजन दे दिया है बल्कि कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में एक नई जान फूकने का काम भी कर दिया है।

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