दादरा नगर हवेली जिला पंचायत में विकास की बहार : दमण और दीव जिला पंचायतों को विकास का इंतजार - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Friday, December 15, 2017
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  • दादरा नगर हवेली जिला पंचायत में विकास की बहार : दमण और दीव जिला पंचायतों को विकास का इंतजार
    - दमण और दीव जिला पंचायत के विकास पर लगा ग्रहण कब हटेगा? - दमण और दीव जिला पंचायतों का 2 साल का कार्यकाल पूरा हो रहा है लेकिन विकास प्रोजेक्ट अभी भी फाइलों में बंद - दादरा नगर हवेली जिला पंचायत महीने में 3 बार विकास प्रोजेक्टों का करती है शुभारंभ लेकिन दमण जिला पंचायत और दीव जिला पंचायत के विकास प्रोजेक्ट को शुरु होने का अभी भी इंतजार
    दमण, 03 अक्टूबर। दादरा नगर हवेली जिला पंचायत द्वारा पिछले 2 साल में लगातार किये जा रहे विकास कार्यों के शुभारंभों को देखकर दमण और दीव की ग्रामीण जनता में यह सवाल उठने लगा है कि कब दमण जिला पंचायत और दीव जिला पंचायत के विकास पर लगा ग्रहण हटेगा और ग्रामीण क्षेत्र की जनता को प्राथमिक सुविधाएं मिलना शुरु होगी। दादरा नगर हवेली जिला पंचायत द्वारा पिछले 2 वर्षों में 60 से ज्यादा विकास प्रोजेक्टों की प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई है। करोडों रुपये के प्रोजेक्ट समयबद्ध तरीके से शुरु होकर खत्म भी हो चुके हैं। पूर्व सांसद मोहन डेलकर के सीधे मार्गदर्शन में दादरा नगर हवेली जिला पंचायत ने गरीब, आदिवासी एवं जरुरतमंद लोगों तक विकास पहुंचाकर ग्रामीण जनता की स्थिति बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। दीव जिला पंचायत सितंबर 2016 और दमण जिला पंचायत अक्टूबर 2016 में नये कार्यकाल के साथ शुरु हुई थी। दो साल का समय दीव जिला पंचायत का बीत चुका है और दमण जिला पंचायत का अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में पूरा हो रहा है। दीव जिला पंचायत के प्रमुख शशिकांत सोलंकी और दमण जिला पंचायत के प्रमुख सुरेश पटेल से दो साल के कार्यकाल पर अगर सवाल पूछा जाये कि आपके पिछले 2 वर्ष के कार्यकाल में कौन-कौन से विकास कार्य जिला पंचायत के माध्यम से ग्रामीण जनता के लिए शुरु किये गये या शुरु करके पूरे किये गये? दोनों प्रमुखों से अगर पूछा जाये कि जिला पंचायत को आवंटित करोडों रुपयों का फंड अब तक इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ है? क्यों अभी तक जिला पंचायत द्वारा विकास को जमीन पर नहीं उतारा गया है? शायद दोनों जिला पंचायत प्रमुख इन सवालों का जवाब ही नहीं दे पायेंगे। क्योंकि पिछले 2 वर्षों में जिला पंचायतों में आधा दर्जन से ज्यादा चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर बदले जा चुके हैं। पिछले 2 वर्षों में विकास प्रोजेक्टों की फाइलों को कई बार अलग-अलग क्वेरी लगाकर बेक टू पवेलियन यानि कि जिला पंचायत वापस भेजा गया। जिला पंचायत प्रमुख और उनके जिला पंचायत सदस्य सिर्फ नाम के ही जनप्रतिनिधि बन कर रह गये हैं। 2-2 वर्ष तक ग्रामीण क्षेत्रों में विकास शुरु नहीं होने से जिला पंचायत पर जनता का आक्रोश और दबाव जबरदस्त बढ गया है। पिछले 2 वर्षों से विकास कार्य अभी शुरु होंगे, विकास कार्य अभी शुरु होंगे कहकर जनता को संयम में रखने में सफल होने वाले अब खुद भी संयम खोने की स्थिति में है। पूरी कहानी का तात्पर्य यह है कि दादरा नगर हवेली में जिला पंचायत धडाधड विकास प्रोजेक्टों को शुरु कर उसे पूरा कर सकती है तो दमण और दीव में यह संभव क्यों नहीं हो रहा है? क्यों पिछले 2 वर्षों से जिला पंचायतों को पंगु की स्थिति में लाकर खडा कर दिया गया है। जबकि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पंचायती अधिकार और पंचायतों के माध्यम से ही जन-जन का विकास पहुंचाने की बात कई बार खुले मंच से कर चुके हैं। अब समय आ गया है कि दमण-दीव को सही में विकसित प्रदेश बनाना हो तो स्थानीय स्वराज संस्थाओं में विकास की गति तेज करनी पडेगी। चीफ ऑफिसरों को अतिरिक्त भारों से हटाकर सिर्फ और सिर्फ स्थानीय स्वराज संस्थाओं में पूर्णकालीन जवाबदारी देनी होगी। स्थानीय स्वराज संस्थाओं की विकास फाइलों को गोल-गोल घुमाने की जगह पर उसे तय समय-सीमा में मंजूरी देकर विकास प्रोजेक्ट शुरु करवाने होंगे। बाकी फिलहाल हालत ऐसी है कि मुंह में निवाला डाल दिया हो और निगलने की और चबाने की परमीशन न दी गई हो। जब विकास प्रोजेक्टों पर आखिरी फैसला चीफ ऑफिसर लेता है जो कि प्रशासन का ही प्रतिनिधि है। टेंडर प्रक्रिया इंंजीनियर एवं चीफ ऑफिसर की निगरानी में होती है वह भी प्रशासन के ही बंदे है। फिर भी टेंडर प्रक्रिया में विलंब, मंजूरियों में विलंब, 24-24 महीने तक विकास के नाम पर फुलस्टॉप अगर लगा रहेगा तो अगला चुनाव जनप्रतिनिधि किस मुंह से लड पायेंगे। 2019 में कौन सा मुंह लेकर जनता के बीच भी जा पायेंगे? इस सवाल पर मंथन करने की जरुरत है।

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