दमण के मुख्य मार्गों से सटी इमारतों एवं घरों के पास लगे रंगीन पट्टों से पैदा हुई असमंजस की स्थिति को दूर करना जरुरी - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Friday, December 15, 2017
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  • दमण के मुख्य मार्गों से सटी इमारतों एवं घरों के पास लगे रंगीन पट्टों से पैदा हुई असमंजस की स्थिति को दूर करना जरुरी
    - पीडब्ल्यूडी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, सिटी सर्वे एवं डीएमसी द्वारा पट्टे लगाने का कार्य जोरों पर - प्रशासन द्वारा इस मुद्दे पर अब तक कोई सटीक जानकारी नहीं दिये जाने के चलते भ्रम की स्थिति
    असली आजादी ब्यूरो, दमण, 23 नवंबर। केन्द्रशासित प्रदेश दमण के मुख्य मार्गों से सटी इमारतों, घरों एवं जमीनों के ऊपर प्रशासन द्वारा लाल, पीले और नीले पट्टे लगाये जा रहे है। पीडब्ल्यूडी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, सिटी सर्वे एवं डीएमसी द्वारा अलग-अलग कलर के पट्टे लगाये जा रहे हैं। इन पट्टों की वजह से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र की जनता में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि इन पट्टों का क्या असर उनकी इमारतों, घरों एवं जमीनों पर पडने आने वाला है। प्रशासनिक गलियारों में जो चर्चाएं चल रही है उसकेमुताबिक, जहां पर लाल पट्टा लगा हुआ है वह सरकार का राइट ऑफ वे है। यानि भविष्य में इतनी जमीन का अधिग्रहण करके सडकों को चौडा किया जायेगा। पीला पट्टा है वह दमण प्रशासन के रेवेन्यू मेप के तहत वह सरकार का अधिकार है। यानि कि पीले पट्टे के अंदर बनी हुई इमारत, घर या जमीन को प्रशासन अपने कब्जे में लेकर सडकों की चौडाई वहां तक कर सकता है। नीले पट्टे का मतलब है कि बिना किसी मंजूरी से बनी हुई इमारत, घर या प्रोपर्टी इसे तोडा भी जा सकता है। कुछ जगहों पर लाल पट्टा और पीला पट्टा समांतर लगा हुआ है। इसका मतलब यह है कि वहां तक की जगह को सरकार ने अधिग्रहित की हुई है, यानि इसका टूटना तय है और वहां तक सडकों को चौडा किया जाना है। खैर यह सभी बातें तो चर्चाओं में हैं लेकिन प्रशासन को इस पूरे मुद्दे पर पत्रकार परिषद बुलाकर या प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जनता को सूचित करना चाहिए। जिससे भ्रम की स्थिति दूर हो और इन पट्टो का रहस्य आसानी से दमणवासी समझ सके। गौरतलब है कि 1961 में दमण आजाद हुआ था। 90 के दशक मेंतो दमण की आबादी काफी कम थी। उद्योग भी गिने चुने थे। होटलें भी गिनी-चुनी थी। लेकिन 1991 में केन्द्र में पी. वी. नरसिम्हा राव की सरकार के समय तत्कालीन वित्तमंत्री मनमोहन सिंह ने केन्द्रशासित प्रदेश दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली का आर्थिक विकास करने के उद्देश्य से उद्योगों को आकर्षित करने के लिए टैक्स होली-डे प्रदेश घोषित किया था। 1996 तक तो दमण में हजारों छोटी-बडी इकाइयां स्थापित हो गई थी। तत्कालीन प्रशासन ने भविष्य को ध्यान में रखते हुए 1996 में सडकों के लिए नोटीफिकेशन जारी किया गया था। शुरुआत में 10.5 मीटर का प्रावधान रोड के मध्य से दोनों तरफ मार्जिन के रुप में रखा गया था। लेकिन फिर प्रशासन ने उस नोटीफिकेशन में संशोधन करते हुए 12.5 मीटर मार्जिन रखना जरुरी कर दिया था। लेकिन कभी भी उस नोटीफिकेशन पर अमल नहीं हुआ। प्रशासन की उदासीनता और जनता में जानकारी के अभाव के चलते मेजर डिस्ट्रीक्ट रोड, अधर डिस्ट्रीक्ट रोड, डीएमसी रोड तथा इंटीरियर रोड में जरुरी मार्जिन को छोडे बिना ही लोगों ने इमारतें, घर, दुकानें तथा उद्योगपतियों ने कंपनी बना दी। 2017 में अब प्रशासन ने इन रंगीन पट्टों के माध्यम से निशान लगाना शुरु किया, तब लोग भी अचंभित है क्योंकि पिछले 22 सालों में किसी प्रशासन ने इस प्रकार का प्रयास नहीं किया था। अब जब यह प्रयास किया जा रहा है तब जनता को भी पूरी हकीकत एवं जानकारी देना प्रशासन का ही फर्ज है।

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