यूनिक स्कूल बनाना और स्कूल का मरम्मतीकरण अलग-अलग होता है यह डीआईए को समझना होगा - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Thursday, July 27, 2017
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • यूनिक स्कूल बनाना और स्कूल का मरम्मतीकरण अलग-अलग होता है यह डीआईए को समझना होगा
    दमण-दीव एवं दानह प्रशासक प्रफुल पटेल के आह्वान पर उद्योगपतियों के सहयोग से डीआईए द्वारा सीएसआर के तहत दमण की विभिन्न सरकारी स्कूलों का नवीनीकरण का कार्य चल रहा है। प्रशासक प्रफुल पटेल ने सरकारी स्कूलों को यूनिक (अनोखा) स्कूल बनाने को कहा है। डीआईए के सिर यह बहुत बडी जिम्मेदारी है क्योंकि उनको तय की हुई सभी 30 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को यूनिक स्कूल बनाना है। यूनिक स्कूल बनाना और स्कूलों के मरम्मतीकरण का कार्य करना दोनों अलग-अलग होता है यह भी डीआईए को समझना होगा। स्कूल को यूनिक बनाने का मतलब होता है कि स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा पद्धति के साधन, छात्र-छात्राओं के बैठने की व्यवस्था, स्कूल का वातावरण तथा स्कूल का प्रवेश द्वार सहित की व्यवस्थाएं यूनिक यानि अनोखी होनी चाहिए, जिससे सरकारी स्कूल सभी मामलों में निजी स्कूलों का मुकाबला कर सके। चाहे इमारत हो, बुनियादी ढांचा हो, शिक्षा पद्धति के साधन हो या अन्य गतिविधियां हो। यानि कहना का मतलब है कि सभी मामलों में सरकारी स्कूलों में पढने वाले गरीब एवं मध्यम वर्ग के बच्चे अपने आपको कमजोर नहीं समझे। प्रशासक प्रफुल पटेल ने डीआईए को बहुत बडी जिम्मेदारी सौंपी है। अब डीआईए की जिम्मेदारी है कि प्रशासक द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारी को गरीबों एवं मध्यम वर्ग के बच्चों की सेवा समझकर पूरी ईमानदारी एवं लगन से पूरा करें। डीआईए सरकारी स्कूलों को सही मायने में यूनिक स्कूल बनाकर दिखाये तब ही डीआईए की जिम्मेदारी पूरी होगी। दमण के इतिहास में पहली बार प्रशासन की ओर से उद्योगजगत को गरीब बच्चों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासक प्रफुल पटेल के आह्वान को उद्योगपतियों ने भी सहर्ष स्वीकार करते हुए डीआईए को योगदान दिया है। ऐसे में नये शैक्षणिक सत्र में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था कहां तक यूनिक बने उस पर सभी की निगाहें रहेंगी। -विजय भट्ट

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