दीव कलेक्टर के नाम पर काउंसिलर से 5 लाख की ठगी का प्रयास - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Monday, October 23, 2017
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  • दीव कलेक्टर के नाम पर काउंसिलर से 5 लाख की ठगी का प्रयास
    - किसी अज्ञात शख्स द्वारा दीव जिला कलेक्टर हेमंत कुमार बोल रहा हूं ऐसा कहकर 5 लाख की आवश्यकता है ऐसा कहकर काउंसिलर दिनेश कापडिया से पैसे की मांग की गई - मोबाइल नंबर +917778877720 से आये इस कॉल के बाद काउंसिल दिनेश कापडिया ने जिला कलेक्टर हेमंत कुमार का संपर्क कर पूरी घटना बताई - जिला कलेक्टर हेमंत कुमार ने काउंसिलर दिनेश कापडिया को तुरंत पुलिस में शिकायत करने को कहा
    असली आजादी ब्यूरो, दीव, 04 अक्टूबर। केन्द्रशासित प्रदेश दीव में जिला कलेक्टर हेमंत कुमार के नाम पर दीव म्युनिसिपल के काउंसिलर से 5 लाख रुपये की ठगी करने का विफल प्रयास सामने आया है। 3 अक्टूबर 2017 को सुबह 11.03 बजे किसी अज्ञात शख्स द्वारा मोबाइल नंबर +917778877720 से काउंसिलर दिनेश कापडिया पर फोन आया कि मैं दीव कलेक्टर हेमंत कुमार बोल रहा हूं मुझे 5 लाख रुपये की जरुरत है। मुझे मेरी बेटी को बाहर पढाई के लिए भेजना है। 5 लाख न हो तो डेढ लाख दे दो मैं मुंबई से बोल रहा हूं। काउंसिलर दिनेश कापडिया को इस प्रकार के कॉल से आश्चर्य भी हुआ और शंका भी हुई। थोडी देर के बाद फिर से इसी नंबर से फोन आया मैं हेमंत कुमार बोल रहा हूं तू दिनेश काउंसिलर बोल रहा है न मुझे डेढ लाख भेज। दुबारा फोन आने के बाद काउंसिलर दिनेश कापडिया ने जिला कलेक्टर हेमंत कुमार का संपर्क कर उन्हें पूरी बात बताई। जिला कलेक्टर ने कहा कि मैंने कोई फोन नहीं किया और न ही ये मेरा नंबर है। आप तुरंत पुलिस में शिकायत करें। जिला कलेक्टर की सलाह पर काउंसिलर दिनेश कापडिया ने तुरंत दीव पुलिस थाने पहुंचकर मामला दर्ज कराया। दीव पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 419, 511 के तहत मामला दर्ज कर इस मामले की जांच शुरु कर दी है। मामले की जांच एसएचओ दीपक वाजा और वालजी वाढेर कर रहे हैं। गौरतलब है कि 2011-2012 में दमण में इस प्रकार से डेवलपमेंट कमिश्नर के नाम पर ठगी की वारदात हुई थी। तत्कालीन डेवलपमेंट कमिश्नर मोहनजीत सिंह के नाम पर तत्कालीन एक्जीक्यूटिव इंजीनियर विश्वंभर सिंह को फोन कर एसबीआई के खाते में 80 हजार रुपया जमा करवाकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया गया था। हालांकि 5 साल के बाद सरकारी अधिकारी के नाम पर फिर एक बार ठगी का प्रयास किया गया है।

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