केन्द्र की मोदी सरकार के 3 साल पूरे होने पर पंचायतों, जिला पंचायतों एवं म्युनिसिपल काउंसिलों के विकास को भी माना जाये पैमाना - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Sunday, May 28, 2017
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    केन्द्र की मोदी सरकार के 3 साल पूरे होने पर पंचायतों, जिला पंचायतों एवं म्युनिसिपल काउंसिलों के विकास को भी माना जाये पैमाना
    - दमण-दीव की स्थानीय स्वराज संस्थाओं में सरकारी बाबूओं द्वारा कराये गये विकास कार्यों की सूची जनता के समक्ष पेश करनी चाहिए
    दमण 19 मई। केन्द्रशासित प्रदेश दमण एवं दीव भी केन्द्र की मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने के जश्न और उत्साह में शामिल होने जा रहा है। केन्द्र की मोदी सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार जोरशोर से चलने वाला है। ऐसे में दमण-दीव की ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र की जनता यह चाहती है कि प्रदेश प्रशासन को मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर दमण-दीव की स्थानीय स्वराज संस्थाओं जैसे पंचायतों, जिला पंचायतों एवं म्युनिसिपल काउंसिलों में कितने विकास कार्य हुए उसकी सूची जनता के समक्ष पेश करनी चाहिए। जनता की मांग है कि दमण-दीव प्रशासन अपना रिपोर्ट कार्ड भले ही पेश करे लेकिन सरकारी बाबूओं द्वारा दमण जिला पंचायत, दीव जिला पंचायत, दमण म्युनिसिपल काउंसिल, दीव म्युनिसिपल काउंसिल और दमण-दीव की सभी 15 पंचायतों में कितना विकास हुआ यह रिपोर्ट कार्ड जरूर सार्वजनिक करना चाहिए। जिला पंचायतों, पंचायतों एवं म्युनिसिपल काउंसिलों में प्रशासन के प्रतिनिधि चीफ ऑफिसर एवं इंजीनियरों के हाथ में ही विकास का रिमोट कंट्रोल रहता है। ऐसे में पिछले तीन सालों में कितनी सडकें बनी, कितने कम्युनिटी हॉल बने, कितने टॉयलेट बने, कितनी गटरें बनी एवं ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र की जनता को कितनी और प्राथमिक सुविधाएं दी गई यह भी प्रदेश की जनता जानना चाहती है। दमण एवं दीव की स्थानीय स्वराज संस्थाओं के विकास कार्यों को भी मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर पेश किये जाने की अतिआवश्यकता है। क्योंकि पिछले तीन सालों से सरकारी बाबूओं ने स्थानीय स्वराज संस्थाओं का गला घोट दिया है। सभी कार्यों के सत्ताधिकारी खुद सरकारी अधिकारी होने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया ठप्प पडी है, ठेकेदारों के बिल भी नहीं चुकाया जा रहा है, स्थानीय स्वराज संस्थाओं के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में जो रख-रखाव के काम है उसे भी नहीं किया जा रहा है। पंचायतों, जिला पंचायतों एवं म्युनिसिपल काउंसिलों से जनता का विश्वास डगमगा गया है। चारों तरफ निराशा का वातावरण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 24 अप्रैल 2015 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर पंचायतों का महत्व, भूमिका और विकास की जिम्मेदारी को अच्छी तरह से समझाया था। कई बार सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्थानीय स्वराज संस्थाओं को ज्यादा अधिकार देने, स्थानीय स्वराज संस्थाओं को और सशक्त बनाने की बात कही थी। लेकिन केन्द्रशासित प्रदेश दमण-दीव के सरकारी बाबूओं ने तो स्थानीय स्वराज संस्थाओं की व्यवस्था पर ही चोट करते हुए पंगु बना दिया है। पिछले तीन सालों से पंचायतों, जिला पंचायतों एवं म्युनिसिपल काउंसिलों में विकास कार्यों को ठप्प करके रखा गया है। गांव में सरपंच को गांव वाले सडक एवं अन्य प्राथमिक सुविधाओं के लिए पकडते है तो सरपंचों के पास जनता को देने के लिए कोई जवाब नहीं होता है। क्योंकि नये सरपंचों को बने हुए 20 महीने का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक गांवों में न तो सडक बनी है और न ही ग्रामीणों को प्राथमिक सुविधाएं मिली है। जिला पंचायत की स्थिति भी ऐसी ही है। जिला पंचायत को भी 20 महीने का समय बीत चुका है लेकिन विकास कार्यों की फाइलें सरकारी बाबूओं के दफ्तारों में पिछले 20 महीने से लगातार घूम रही है। दमण म्युनिसिपल काउंसिल की नई बॉडी को भी 15 महीने का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक किसी भी वॉर्ड में स्थानीय विकास कार्य शुरू नहीं हुए है। दिगर बात यह भी है कि प्रशासक के तौर पर प्रफुल पटेल को 9 महीने का समय होने को आया है। इन 9 महीनों में प्रशासक प्रफुल पटेल ने प्रदेश स्तर के बडे-बडे प्रोजेक्टों को मंजूर कराकर लागू कराने की दिशा में सफलता प्राप्त की है। लेकिन उनके अधीनस्थ अधिकारी उन्हें यह रिपोर्ट नहीं दे रहे है कि स्थानीय स्वराज संस्थाएं ठप्प हो चुकी है। पिछले तीन सालों में कोई काम नहीं हुआ है। अगर प्रशासक प्रफुल पटेल स्थानीय स्वराज संस्थाओं को पुन: जीवंत करने की दिशा में आदेश जारी करेंगे तभी दमण-दीव की स्थानीय स्वराज संस्थाओं के लिए मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने का जश्न सही मायने में एक उत्सव जैसा होगा। भले ही सडकें, कम्युनिटी हॉल एवं बुनियादी सुविधाओं का निर्माण कार्य सरकारी एजेंसियों की निगरानी में हो लेकिन कम से कम शुरू तो हो। ताकि जनता ने जिस आस के साथ स्थानीय स्वराज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को चुना है वो पूरा हो।

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