बाबूजी कैसे मरे........??? - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Tuesday, September 26, 2017
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • बाबूजी कैसे मरे........???
    आज इतवार का दिन था मैं सुबह-सुबह मोर्निंग वॉक करने के लिए मोटी दमण किले से गुजर रहा था। तभी मेरी निगाह नारदजी पर पडी। नारदजी मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहे थे। मैं भी तेजी से चलकर उनके नजदीक पहुंचा। नारदजी के बिल्कुल नजदीक पहुंचकर मैंने नारदजी को नमस्कार करते हुए कहा कि प्रणाम नारदजी, कैसे हो? नारदजी ने इशारों में तथास्तु किया और मुझे चुप रहने का इशारा किया। साथ ही साथ वे मोबाइल पर बातें करते रहे। सामने वाले की तो आवाज सुनाई नहीं दे रही थी लेकिन नारदजी चिल्लाकर बोल रहे थे कि तुम समझाओ न उसे। तुम क्यों नहीं उसे बताते हो। ये तो बाबूजी कैसे मरे जैसी कहानी हो गई। इतना बोलकर नारदजी ने फोन काट दिया। फिर मेरी तरफ मुखाबित होते हुए बोले कैसे हो वत्स! मैंने चेहरे पर जबरन हंसी लाते हुए कहा कि आपकी कृपा से सब कुछ ठीक चल रहा है। नारदजी बोले अच्छी बात है। फिर मैंने नारदजी से मोबाइल फोन पर चल रही बातचीत के बारे में जानने की कोशिश करते हुए सवाल पूछा, नारदजी किसे समझाने की बात कर रहे थे। बाबूजी कैसे मरे ये क्या मामला है। नारदजी बोले जाने तो वत्स ये समझने की तुम्हारे बस की बात नहीं है। नारदजी का रूख देखकर मैं थोडा भौचक्का रह गया। मैंने हिम्मत जुटाकर नारदजी से कहा हे अंतर्यामी सैटेलाइटों से भी तेज न्यूज चैनलों के स्वामी कृपा करके पूरी कहानी बताने की कृपा करें। नारदजी को शायद मेरी हालत पर दया आयी उन्होंने बताना शुरू किया। वत्स! दमण शहर के एक मोहल्ले में 80 साल के एक बुजुर्ग की मौत हो गई। उनके पुत्र द्वारा अपने पिता को श्रद्धांजलि देने के लिए शोकसभा का आयोजन किया गया था। शाम 5 बजे लोगों का आना शुरू हुआ। सबसे पहले पहुंचे व्यक्ति ने उस बुजुर्ग के पुत्र को पूछा, बाबूजी को क्या हुआ था? बाबूजी की मृत्यु कैसे हुई? बुजुर्ग के बेटे ने बताना शुरू किया। शाम को बाबूजी मजे में थे, रात को खिचडी-कढी खायी, रात को दूध पिया, इतना बताया तब तक दूसरा व्यक्ति आया और उसने पूछा कि अचानक बाबूजी को क्या हो गया? फिर से बेटे ने बताना शुरू किया शाम को बाबूजी मजे में थे, रात को खिचडी-कढी खायी, रात को दूध पिया। बाबूजी थोडी देर टहले। इतना बेटे ने बताया कि तीसरा व्यक्ति शोकसभा में पहुंचा और उसने पूछा अरे इतने हट्टे-कट्टे बाबूजी कैसे मर गये। फिर से बुजुर्ग के बेटे ने कहानी सुनाना शुरू किया। नारदजी बोले मैं दो घंटे तक शोकसभा में बैठा रहा लेकिन मुझे आखिर बाबूजी को क्या हुआ था, बाबूजी क्यों मरे यह राज पता नहीं चला। नारदजी की बात सुनकर मैं जोर-जोर से हंसने लगा। नारदजी बोले यह हंसने की बात नहीं है। इस कहानी से कुछ सबक लेने की जरूरत है। मेरी अचानक हंसी बंद हो गई। मैं नारदजी की ओर आश्चर्यचकित नजारों से देखने लगा। मेरी आंखों में उठ रहे सवाल को नारदजी समझ गये। नारदजी ने मेरे हाथों में पिछले 7-8 सालों में दमण में नियुक्त कलेक्टरों की सूची थमा दी। लंबी-चौडी लिस्ट देखकर मैं थोडा हिचक गया। नारदजी ने बताया वत्स! पिछले 7-8 सालों में इतने कलेक्टर बदल चुके है जिससे कलेक्ट्रेट कार्यालय के कामकाज पर गंभीर असर पडा है। एक कलेक्टर छ महीने के भीतर कुछ हद तक समझे एवं कलेक्ट्रेट के कामकाज को कुछ हद तक सीखे तब तक तो उसका तबादला हो जाता है। दूसरा आता है वो पुराने आदेशों को समझे या सीखे उससे पहले उसका भी तबादला हो जाता है। नारदजी ने बताया कि यही हालात दमण एवं दीव म्युनिसिपलों के चीफ ऑफिसरों, जिला पंचायत के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसरों एवं अन्य महत्वपूर्ण पदों पर आसीन अधिकारियों का है। यह अधिकारी जब तक अपनी पूरी जिम्मेदारी एवं प्रदेश की स्थिति को समझते है तब तक उनका तबादला हो जाता है। इस तबादले के कारण दमण-दीव का विकास रूक जाता है। कलेक्टरों के लगातार तबादलों के चलते कलेक्ट्रेट कार्यालय से जुडे एनए, सेल परमीशन, जमीन संपादन, जमीन संपादन के भुगतान, लाइसेसों का रिन्यू करना सहित के कार्य अधर में लटक जाते है। इसके चलते उद्योगजगत, लैंड डेवलपर्सों, स्थानीय नागरिकों तथा किसानों को दिक्कतों का सामना करना पडता है। इसी तरह स्थानीय स्वराज संस्थाओं में बार-बार चीफ ऑफिसरों एवं चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसरों के तबादलों के चलते स्थानीय स्वराज संस्थाओं का विकास पिछले ढाई सालों से लगभग ठप्प पडा है। इस प्रकार उस बुजुर्ग का बेटा अपने पिता की मृत्यु का कारण पूरी तरह से बताने में असमर्थ रहा था इसी तरह लगातार तबादलों से बदलती प्रशासनिक व्यवस्था के चलते अपनी-अपनी फाइलों को लेकर घूम रहे लोग भी आखिरी स्थिति क्या थी यह समझा नहीं पा रहे है। क्योंकि अधिकारी बदलते ही फिर से कहानी दोहरानी पडती है तब तक वह पूरी कहानी समझाये उससे पहले ही अधिकारी का तबादला हो जाता है। नारदजी ने कहा समझे वत्स! मैंने दोनों हाथोें को जोडकर नारदजी को क्षमा कहते हुए कहा माफ करना नारदजी आपने बुजुर्ग और उसके बेटे की कहानी के जरिये दमण-दीव की वास्तविक परिस्थिति का परिचय दे दिया है। मैंने मार्मिक बात को समझ नहीं पाया था। नारदजी ने मुस्कुराते हुए कहा कि कोई बात नहीं वत्स! कम से कम इतना करना कि मेरे द्वारा कही गई इस कहानी और इसके अर्थ को अपने अखबार के माध्यम से जरूर छापना। मैंने कहा जरूर नारदजी। नारदजी तथास्तु कहकर लाइट हाउस की तरफ चले गये। मैं वही खडा रह गया और नारदजी को दूर तक जाते देखता रहा। मेेरे मन में नारदजी के शब्द गूंज रहे थे। मुझे प्रसिद्ध वकील एवं काउंसिलर मारियो लोपेस द्वारा कही गई बात याद आयी। मारियो लोपेस ने कुछ दिन पहले ही गोवा राज्य के साथ दमण-दीव जब था तब क्या स्थिति थी उसको बताया था। मारियो लोपेस ने कहा था कि गोवा राज्य द्वारा पूरे दो साल के लिए दमण और दीव में कलेक्टर नियुक्त किये जाते थे। इतना ही नहीं म्युनिसिपल काउंसिलों में भी पूरे दो साल के लिए चीफ ऑफिसर नियुक्त होते थे जिससे स्थिर विकास की संभावनाएं उस वक्त ज्यादा थी। लेकिन पिछले 7-8 सालों में दमण कलेक्टर, दीव कलेक्टर, दीव म्युनिसिपल चीफ ऑफिसर, दमण म्युनिसिपल चीफ ऑफिसर, दमण जिला पंचायत चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं दीव जिला पंचायत चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर के इतनी बार तबादले हुए है कि दोनों जिलों के लोग परेशान है। मैंने निश्चय किया कि नारदजी की इस मार्मिक कहानी को अखबार के पन्नों पर जरूर उतारूंगा।
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