नये साल में योजनाओं को पूरा कर जनअपेक्षाओं पर खरा उतरना संघ प्रशासन के लिए बडी चुनौती - Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli Asli Azadi Hindi News paper of Union territory of daman-diu & Dara nagar haveli
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  •         Saturday, September 22, 2018
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  • संपादक : विजय भट्ट सह संपादक : संजय सिंह । सीताराम बिंद
  • नये साल में योजनाओं को पूरा कर जनअपेक्षाओं पर खरा उतरना संघ प्रशासन के लिए बडी चुनौती
    - केन्द्र की मोदी सरकार और दमण-दीव एवं दानह प्रशासन की योजनाओं एवं प्रोजेक्टों के लिए वर्ष 2018 महत्वपूर्ण - 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दमण-दीव एवं दानह की जनता की उम्मीदों को पूरा करना चुनौती से कम नहीं
    दमण। वर्ष 2017 अब समाप्त हो चुका है। 2018 का आगाज हो गया है। दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली के लिए 2018 का वर्ष काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। क्योंकि 2014 में केन्द्र में मोदी सरकार के गठन के बाद शुरू की गई योजनाओं को दोनों संघ प्रदेशों में जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह आखिरी साल मात्र शेष है। इसी तरह 2016 में दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली के प्रशासक के तौर पर प्रभार संभालने वाले प्रफुल पटेल द्वारा दोनों संघ प्रदेशों के लिए घोषित की गई परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी एक वर्ष का ही समय बाकी है। 2019 में दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली की जनता 5 साल केन्द्र की मोदी सरकार एवं दो से ढाई साल राजनैतिक प्रशासक द्वारा किये गये कार्यो का लेखा-जोखा देखेगी। 2018 के शुरू में ही प्रशासक प्रफुल पटेल को सबसे ज्यादा ध्यान देना होगा क्योंकि उन्हें न सिर्फ संघ प्रशासन द्वारा घोषित की गई परियोजनाओं को तेजी से शुरू करवाना होगा बल्कि केन्द्र सरकार की जनहितैषी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाना होगा। वर्तमान स्थिति में दमण-दीव एवं दादरा नगर हवेली में केन्द्र सरकार की योजनाएं जन-जन अभी भी पहुंची नहीं है। कहीं पर बैंकों ने अडिंगा लगाया है तो कहीं पर अधिकारियों की लगातार चल रही समीक्षा बैठकों के चलते अधिकारी ग्राउंड जीरो पर समय ही नहीं दे पा रहे है। जनप्रतिनिधि भी केन्द्र सरकार की योजनाओं के प्रति उदासीन है क्योंकि स्थानीय स्तर पर जो छोटे-मोटे काम सडक, कम्युनिटी हॉल, गटर जैसे लंबे समय से शुरू नहीं हो पाये है। गांव का विकास गांव के स्तर पर, जिला का का विकास जिले स्तर पर, शहर का विकास शहर स्तर पर और प्रदेश का विकास प्रदेश स्तर पर होने के फॉर्मूले के बजाय गांव के छोटे-छोटे कामों की फाइल भी पीडब्ल्यूडी के पास मंजूरी के लिए पहुंच रही है। जिला पंचायत एवं म्युनिसिपल का भी यही हाल है। पीडब्ल्यूडी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर और चीफ इंजीनियर प्रदेश स्तर के प्रोजेक्ट में इतने व्यस्त है कि वे स्थानीय स्वराज संस्थाओं के लिए समय ही नहीं निकाल पा रहे है। खैर प्रशासन इस समस्या का समाधान करे तो जनप्रतिनिधियों की नाराजगी दूर हो जायेगी और सभी जनप्रतिनिधि प्रशासन के साथ मिलकर केन्द्र और संघ प्रशासन की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सक्रिय भी हो जायेंगे। खैर इस मसले को तो राजनैतिक अनुभवी प्रशासक प्रफुल पटेल ही सुलझा सकते है। गौरतलब है कि वर्ष 2017 में मोदी सरकार ने जनहितैषी योजनाओं को ठोस तरीके से लागू करने के लिए सभी राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों को टारगेट दिया था। 2018 में भी योजनाओं के लिए आखिरी डेटलाइन दिये जाने की संभावना है। 2018 में संघ प्रशासन को दो मोर्चा पर कमर कसनी पडेगी। एक जल्द से जल्द मोदी सरकार की योजनाओं को लागू कर जनता को लाभान्वित करना और दूसरी ओर संघ प्रशासन द्वारा घोषित परियोजनाओं को सफलतापूर्वक समाप्त कर जो वादा स्वतंत्रता दिवस पर प्रशासक प्रफुल पटेल ने संघ प्रदेशों की जनता से दिया था उसे पूरा करना होगा।

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